रहस्यमयी लायब्रेरी(Mystery of Library)

 मुझे पुस्तकें पढ़ने का बड़ा शौक था,पर ये प्रेम कभी ऐसा भी भारी पड़ जाएगा, सोचा न था। मेरी जॉब ऐसी थी कि हमेशा स्थानांतरण की स्थिति बनी रहती। एक शहर से दूसरे शहर फिर दूसरे शहर से तीसरे शहर ,यही जिंदगी का फलसफा बन गया था। शादी तो हुई नहीं थी,अकेला ही घूमता रहता। मेरे परिवार में मेरी मां […]

मुक्ति –विमोचन(Untouchable feelings of Life)

 सदियों से औरतों पर बहुत से बंधन लादे गए हैं। कई तरह की अपेक्षाओं से गुजरती औरत आजादी के झरोखों से अपने अस्तित्व को आसमान में उड़ते देखने लगी है, पर कुछ जकड़न को आज भी कुछ औरतें अपने मन से निकाल नहीं पाई है, चाहे वह कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच क्यों न जाए। जरूरी नहीं है कि औरत […]

स्थानांतरण(Transfer )

  मधुर स्मृतियां धूप– छांव सी पतझड़ में लगती वसंत बहार– सी  सालों से जिन यादों को जीती आई कभी हर्ष तो कभी विषाद की रेखा उभर आई किसी से गिले तो किसी से शिकवे कब किन परिस्थितियों में जिंदगी बन जाती है वनवेयादों की पोटली चितवन से झांकतीपुराने जगह की स्मृति या नए जगह की प्रतीतिअसमंजस में मन की भावनाओं का समुंदरक्या करूं,कैसे करूंशुरुआत चल रही […]

गहराइयां(Gahraiyaan)

अपने घर के सामने की बालकनी मेंएक युगल बूढ़े को देखा करती थीकब तक का है साथहर दिन यही सोचा करती थीहँस हंस कर आपस में बातें करनाकांपते हाथों से एक दूसरे के कपड़ों को यूं फैलानारास्ते की आवाजाही को देखकरआपस में यूं मुस्कुरानाउनके उम्र की सिलवटों को देखकरधड़कनें व्याकुल हो जाती थीपता नहीं ये साथ कब तक का होयही […]

Happy Father’s Day(My words for my Father)

 तेरी उंगली पकड़कर  नन्हें पैरों से चलकर  जब दुनिया देखी  पिता की छांव में  अपने को महफूज पाया  खुद की इच्छा को मारकर  खून पसीना बहाकर  पिता ने मंजिल दिखलाया  ऊपर से सख्त पर अंदर से नर्म  पिता शब्द का है असली मर्म  जीवन की हर कठिनाइयों से   लड़ना सिखलाया  मुसीबतों से पहले  पिता का साया पहले पाया  अपने आंसुओं […]

Blackboard(शिक्षा का प्रथम सोपान)

तीन लोगों ने मिलकर एक छोटे से स्कूल की स्थापना की थी।इन तीनों में से एक थे रवींद्र सर,जो घूम– घूम कर गांव वालों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उनके घर तक चले गए।इस स्कूल का नाम था–सर्वयोदय विद्यालय।अपनी उम्र के 30वें बसंत से ये जिम्मेदारी उठाया। पढ़ाना इनके लिए पूजा से कम नहीं थी।एक स्याह ब्लैकबोर्ड […]

घुंघरू

 तवायफों का वह मुहल्ला, जहां शरीफों के कदम रात के अंधेरों में चहलकदमी करने जरूर आते हैं।भले ही दिन के उजाले में यहां आने से कतराते हों पर दिन ढलते ही जाम से जाम टकराने लगते हैं। कई अट्टालिकाएं थीं, जहां दिनभर मुजरों का आयोजन होता रहता तथा पैरों में बंधी घुंघरुओं की आवाज चारों तरफ गूंजती रहती।तवायफों के नृत्य–संगीत […]

परछाईं

  खिड़की की ओट में थी खड़ी  तभी पीछे नज़र पड़ी  थी वो मेरी सहचरी   जो संग थी खड़ी   हां! तू है मेरी परछाई  जो हमेशा मेरे पास नज़र आई   कुछ सवालें मन में उठ रही हैं     क्यूं अपेक्षाओं की कतारें  औरतों के ही जीवन में लगी है  अपने वजूद को भूल हम   सामाजिक ताम झाम को समेटने में […]

ढाई अक्षर प्रेम के❤️❤️

  मां! मैं कॉलेज जा रही हूं, कहते हुए अक्षरा ने अपना दुपट्टा उठाया और किताब लेकर जैसे ही आगे बढ़ी, तभी पीछे से मां ने आवाज लगाई,अरे बेटा! थोड़ा तो सब्र कर ले, कॉलेज में आज तेरा पहला दिन है, थोड़ा दही- शक्कर खा ले।उफ़!ये मां ना हर समय शुभ- अशुभ की बातें करती रहती हैं। फिर भी उनकी […]

मौत है दूजा नाम जिंदगी का

10 दिन हो गए थे मुझे ICU में भर्ती हुए,पर मेरी तबियत दिनों– दिन बिगड़ती ही जा रही थी।शरीर का एक –एक हिस्सा मशीनों से जकड़ा हुआ था।उस वार्ड में सभी लोग जिंदगी और मौत से ही तो खेल रहे थे।मेरी आंखों के सामने तीन लोगों ने अपनी जिंदगी से पनाह मांगी।मौत का नजारा तो यहीं मिलता है।              उस दिन […]