आरक्षण की गुमशुदगी

पूरे देश में महिला आरक्षण की बात फैली हुई थी। अगर देश को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं की भी सत्ता में भागीदारी आवश्यक है। देश की आधी आबादी यूं अपने अधिकार से वंचित रह जाए, हमें यह स्वीकार नहीं–इसी तरह के नारों से देश गूंज रहा था। राजनीतिक पटल पर ये मुद्दा विपक्षी पार्टी गेंद की तरह उछाल रहे […]

फटे कपड़े:बदहाली या आधुनिकता

कहीं फैशनपरस्त जिंदगीतो कहीं जिंदगी में बेचारगी की मौजूदगीफटे वस्त्रों में तन दिखता हैतो कहीं तन दिखने के लिए वस्त्र फटता हैआधुनिकता की होड़ तो देखोफटी जींस ऊंचे दामों पे बिकती हैऔर उस गरीब की फटी धोती किसी को नजर नहीं आती हैफटी जींस आधुनिकता की पहचान हैतो इन चिथड़ों से झांकती जिंदगी की भी दास्तां हैकिसी धागे से दूरी […]

कल्पनातीत(unthinkable life)

           गोमती नदी के मुहाने पे एक नवयुवती विक्षिप्त– सी औंधे मुंह पड़ी हुई थी। जाको राखे साइयां मार सके ना कोई– इस बात को चरितार्थ करती गोमती माई की लहरों ने भंसाली गांव के इस तट पे युवती को लाकर पटक दिया था।                 सुबह का समय था, सूरज की निकलती मुखरित किरणें उसके मलिन होते चेहरे पे पड़ रही थी। पर […]

जिंदगी मेरे घर आना🦚🐥🐦🦜(Happiness in life)

जिंदगी मेरे घर आनाखुशी की एक थाप लगानाकुछ अधूरा सा लगता हैख्वाब भी जैसे सच सा लगता हैउलझनों का ताना बानाजिंदगी मेरे घर आनागुजरे हुए अतीत मेंभविष्य के स्पंदन की आशासामने बैठा वर्तमान देख रहा है तमाशावक्त है सबसे बड़ाजिसके आगे ना कोई हुआ है खड़ाहर लम्हों को खुलकर जीनाजिंदगी मेरे घर आनाकुछ दूर से कुछ करीब सेअब तक जो […]

100 का नोट

 एक चमचमाती हुई कार एक ढाबे के सामने आकर रुकी। शीशा हटा और अंदर से एक रौबदार आवाज ढाबे वाले के कान में पड़ी, अरे! माखनलाल, जरा 1kg बर्फी pack कर देना। ढाबे वाले ने तुरंत अपने नौकर को भेजा मिठाई लेकर। कार के शीशे से छन कर आती सूरज की रोशनी वहीं ढाबे के बाहर बर्तन धो रहे एक […]

Jalta diya(जलता दीया)

एक दीयाजलता– साबुझता– साहवा के रुख सेलड़ रहा थाअपनी लौ को समेट रहा थातभी एक ओट ने पनाह दीफड़फड़ाती लौ को जीने की राह दीअब मैं टिमटिमाता रहता हूंअंधेरों को अपनी रोशनी से चीरता रहता हूं। some more posts 1.स्थानांतरण(Transfer) 2. परछाईं

Fufaji on🤚🤚

 एक थे हमारे fufaji जिनको संक्षेप में रिटायर्ड जीजाजी की पदवी से उद्घोषित किया जा सकता है। Black &white TV की तरह ही अकड़ भी पाई थी इन्होंने। जैसे टीवी के चैनल को बदलने के लिए इसके स्विच को घूमाना पड़ता है,ठीक वैसे ही इनकी प्रशंसा में पुल बांध दो,तब तो फूफाजी चने की झाड़ पे चढ़ जाते। फिर एकाएक […]

ज्वलंत प्रश्न

गुलामी से आजादी तक का सोपान जब करती हूं देश का ध्यान #आज हम स्वतंत्र हैं पर ये प्रश्न ज्वलंत है देश के वीरों ने जो सपना देखा जान की बाज़ी लगा जिसके महत्व को कर दिया है हमने अनदेखा अपने ही लोगों से देश हो रहा है आहत भ्रष्टाचार,खून खराबा,बलात्कार की लगी है जमघट #आज हम स्वतंत्र हैं पर […]

Inside Story(वो फल वाला)

गर्मी  की उमस भरे दिन में बालकनी के मुंडेर पे अपना हाथ रखकर पता नहीं रोजमर्रा की उलझनों में अपने आप को समेटे हुए जाने क्या सोच रही थी| चिल -चिलाती हुई धूप थोड़ी देर में ही आँखों को खटकने लगी | उस पर से लू की गर्म हवा चेहरे को झुलसा रही थी | चारों तरफ नज़र दौड़ाया तो […]

रहस्यमयी लायब्रेरी(Mystery of Library)

 मुझे पुस्तकें पढ़ने का बड़ा शौक था,पर ये प्रेम कभी ऐसा भी भारी पड़ जाएगा, सोचा न था। मेरी जॉब ऐसी थी कि हमेशा स्थानांतरण की स्थिति बनी रहती। एक शहर से दूसरे शहर फिर दूसरे शहर से तीसरे शहर ,यही जिंदगी का फलसफा बन गया था। शादी तो हुई नहीं थी,अकेला ही घूमता रहता। मेरे परिवार में मेरी मां […]