स्कूलों का आधुनिकीकरण ::शिक्षा बनाम ब्यवसाय

बच्चे की प्रथम पाठशाला उसके स्वयं का घर ,उसके माता -पिता होते हैं | उसके बाद जब वह घर से निकलता है तो शिक्षा का केंद्र स्कूल बन जाते हैं | सीखने की पहली सीढी -“स्कूल “| पहले जमाने में इसे पाठशाला बोलते थे | पाठ + शाला  =पढ़ने का घर | वैसे इसे आज भी पाठशाला बोल सकते हैं | पर आज के सन्दर्भ में कोई इसे नहीं बोलना चाहेगा | स्कूल हमारी बुनियाद होते हैं | ज्ञान की पहली सीढ़ी|
                                                         
                                                   आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो पहली वाली स्थिति रही ही नहीं | आज स्कूल स्कूल नहीं रहा ,एक अनदेखा ,अनकहा व्यवसाय बन चूका है | इस हद तक स्कूलों का आधुनिकीकरण हुआ है ,जो हमारी सोच के दायरे से भी बढ़कर है |
                                 आज से 10 साल पहले के स्कूलों का आकलन कीजिए तो आपको समझ में आ जाएगा कि परिस्थितियाँ कितनी बदल चुकी हैं | ऐसा नहीं है कि 10 साल पहले के स्कूलों में फ़ीस नहीं ली जाती थी या private स्कूलों में extra charges नहीं लिए जाते थे  | पर आज की तुलना में बहुत कम था| अब आप बोलेंगे कि महँगाई बढ़ रही है ,तो उसका असर तो इन पर पड़ेगा ही | ये बात भी सही है | पर सबसे बड़ी बात यह है कि changes आने में कोई बुराई नहीं है ,बस changes की हवा समाज के हर तबके के लोगों को लगनी चाहिए | और यही चीज नहीं हो पाता  है |

                                                   metrocity के स्कूलों की तो बात ही अलग है | इतने सारे ताम -झाम हैं कि माता -पिता की कमर ही टूट जाती है | पर भेड़ -चाल और अपना स्टेटस बनाये रखने के लिए वे हर संभव कोशिश करते रहते हैं |
                                              जहाँ तक मुझे याद है ,पहले स्कूलों में एक बार admission fee ले ली जाती थी | उसके बाद सीधे आप बोर्ड का exam देकर निकलिए | पर आज बात वैसी रही नहीं | अब तो हर साल एक मोटी रकम admission fee के रूप में वसूली जाती है | इसके अलावा bus charges ,extra calculative के पैसे अलग ही जाते हैं | Private school तो ऐसा -ऐसा condition लगाते हैं  कि पूछो ही मत | मसलन ,school dress ,कॉपी -किताब, school से related चीजें –इन सबका ठेका वे अपने रिश्तेदारों को दे देते हैं ,जिसका लाभ दोनों को बराबर मिलता रहता है |
                                            विडम्बना यह है कि शिक्षा आज एक ऐसा व्यवसाय बन चुकी है ,जिसने अच्छी शिक्षा को पैसे वाले की बपौती बना दिया है | अब ग़रीब माँ -बाप के बच्चे केवल दूर से ही टक -टकी लगाकर इन स्कूलों को देखते रहते हैं | उनकी सोच बस सोच ही बन जाती है कि काश उनके बच्चे भी यहाँ पढ़ते |
                                                 

                                                                    ये नहीं कि केवल metrocity का ही ये हाल है | ये व्यवसायीकरण  गावों तक भी पहुंची है | जिस स्कूल के आगे private लग गया ,वह मोटी fees की चलती -फिरती दूकान बन गयी | आप आंकड़ें उठाकर देखिये तो पाएंगे कि सरकारी स्कूलों में ज्यादातर ग़रीब वर्ग के बच्चे ही जाते हैं ,क्यूँकिं मोटी fees भरना इनके बस की बात नहीं होती है |
                                              कभी आपने सोचा है कि इन सबमें कहीं न कहीं आप और हम भी जिम्मेवार हैं | हमारे मन में ये बात बैठी हुई है कि जितना महँगा स्कूल ,उतना अच्छा स्कूल | हम अपने बच्चों को उसी महंगे रेस का हिस्सा बना देते हैं |ऊँची -ऊँची building ,fully A C ,तमाम सुविधाएं ये सब आती कहाँ से हैं ? व्यवसायीकरण की तो बात ही मत पूछिए | अब तो बच्चों को copy ,pencil आदि चीज़ें भी अंदर ही मिल जाती हैं | बाहर से कुछ लेना भी होता है तो इनके अपने ही shop खोले रहते हैं ,जहाँ school dress ,bag ,स्कूल में लगने वाली चीज़ें मिल जाती हैं | इसे हम क्या कहेंगे ? business ही तो है |
                                             

                                                                        जहाँ स्कूलों में admission की लिस्ट निकलती है , माँ -बाप line में घंटों खड़े रहकर धक्के खाते हुए नजर आते  हैं| उनकी बस यही कोशिश रहती है कि उनका बच्चा अच्छे -से -अच्छे स्कूल में दाखिल हो जाए ,भले ही उन्हें कितना पैसा भरना पड़े | लेकिन इसके गलत पहलू में सबसे बड़ी बात यह हो जाती है कि ये स्कूल अपनी सीट भी निर्धारित कर देते हैं | सीट अगर full हो गया तो admission नहीं हो सकता | अगर admission हो भी जाता है तो donation के नाम पर ही अचम्भा होने लगता है | Admission के समय जो पैसे लगते हैं ,उसमे पूरे साल में जो भी activity स्कूल में होगी ,उसके भी charges जुड़े होते हैं | पर ये बात parents को धोखा देने वाली होती है | इसके अलावा भी charges लगते रहते हैं | पर इसके खिलाफ आवाज़ कौन उठाये ?न सरकार कुछ करती है और न ही माता -पिता को कोई objection होता है | कई parents तो ऐसे होते हैं जिन्हें ये सब कुछ गलत लगता ही नहीं है |
   
                                                  सबसे आश्चर्य वाली बात तो तब हो जाती है ,जब admission के समय बच्चे के साथ -साथ माँ -बाप का भी interview होता है | मेरा कहना है कि जिनके माँ -बाप पढ़े -लिखे नहीं होते हैं ,क्या उनके बच्चे को अच्छे स्कूलों में पढ़ने का हक़ नहीं है ? क्या English जानने वाले माँ -बाप ही अपने बच्चों को english school में पढ़ा सकते हैं ?
                                                               ऐसे भी English और Hindi के बीच में इतना distance है ,जिसे चाह कर भी काम नहीं कर सकते | English जानने वाले मॉडर्न और हिंदी जानने वाले गाँव के माने जाते हैं |
                                                 खैर ,बात स्कूलों की हो रही थी न कि इन भाषाओं की | हर माँ -बाप का सपना होता है कि अपनी हैसियत से बढ़कर अपने बच्चों को पढ़ाएं | कुछ माँ -बाप तो अपना status symbol ही बनाते हैं कि शहर के सबसे best school में मेरा बच्चा पढता है ,चाहे उनका बच्चा पढ़ने में ध्यान दे या नहीं |
                                                               इसमें सरकार भी कम जिम्मेवार नहीं है | अगर सरकारी स्कूल को वो सभी सुविधाएं मिलें ,जो Private school में दी जाती है तो बात ही कुछ और होती | इस बात को मज़ाक के रूप में लिया जाता है कि अगर पढ़ाई पे ध्यान नहीं दोगे ,तो सरकारी स्कूल में डाल दिया जाएगा | ये सारी images किसने बनायीं ? हमारी व्यवस्थाओं  ने | सरकारी स्कूल में न ढंग की पढ़ाई होती है और न ही बच्चों को आगे बढ़ा ने के लिए सुविधाएं दी जाती हैं |
                                                                  जबकि सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूल के teacher बहुत सारे exam cross करके इन ओहदों तक पहुँचते हैं | जाहिर सी बात है कि ये qualified होंगें ही | लेकिन कुछ अपवादों को छोड़कर इन्होने अपना image और उत्तरदायित्व दोनों ख़राब कर लिया है | अपनी जिम्मेवारियों का अगर जरा -सा भी भान इनको होता तो शायद सरकारी और प्राइवेट के बीच के अंतर को कम किया जा सकता था | इसके इतर निजी स्कूलों में ये सब बातें नहीं होती | ऐसा नहीं है कि Private स्कूल के Teacher Qualified नहीं होते हैं | इसके साथ -साथ इन स्कूलों का अपने Teacher पे अँकुश भी रहता है ,जिसका लाभ इन बच्चों को मिलता रहता है | तब माँ -बाप क्या करेंगे ? अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें Private स्कूलों की तरफ रुख करना ही पड़ता है |

                                                       ऐसे भी शिक्षा का आधुनिकीकरण हो गया है | जो पढ़ाई हम पढ़े हैं ,वो आज की शिक्षा से मेल नहीं खाती है | पढ़ने और पढ़ाने के तरीके बदल गए हैं | और ये सारी  चीज़ें निजी स्कूलों में मिल जाती है | तो क्यों न बच्चे उधर का ही रुख करें | Smart classes ,स्कूल की शानदार building ये सब मृग -मरीचिका की तरह ही काम करते हैं ,भले ही उस स्कूल की faculty अच्छी हो या न हो |

                                    किसी भी चीज की अगर negative बात होती है तो उसके positive पक्ष को भी देखना चाहिए | स्कूलों के आधुनिकीकरण से कुछ नुकसान हुआ है तो कुछ फायदे भी हैं | पुराने ज़माने के पढ़ाई के तरीके और आज के ज़माने के पढ़ाई के तरीकों में बहुत अंतर आ गया है | आज की पढ़ाई Global हो गयी है | कहने का मतलब यह है कि आजकल की पढ़ाई का आधार तकनिकी हो गया है | बच्चों को वैसी ही शिक्षा दी जाती है ,जो उन्हें आगे काम आए | पहले बच्चे केवल पढ़ाई करते थे | पर अब स्कूलों में पढ़ाई के साथ -साथ अलग -अलग तरह की activities भी करवाई जाती है | मसलन ,खेल -कूद ,कंप्यूटर ,गाना ,डांस वगैरह वगैरह | स्वाभाविक सी बात है कि इन सबके लिए स्कूलों में ये सारी सुविधाएं रखनी ही होगी | 
                                    और हो भी क्यों न | इन स्कूलों ने समय के साथ -साथ चलकर अपनी पढ़ाई के तरीकों को बदला और बच्चों को पढ़ाना आसान कर दिया | अब बच्चे खेल -खेल में पढ़ाई कर लेते हैं | साथ ही साथ पढ़ने के अलावा बहुत सारी acivities भी होती रहती है | तो क्यों न माँ -बाप इधर आकर्षित होंगे ? और ये लाजिमी भी है | 
                             निजी स्कूल इन्ही सब चीजों की ही तो मोटी रकम वसूलते हैं | सरकारी स्कूलों में तो ये सब चीज़ें होने से रहीं | माता -पिता भी चाहते हैं कि अपने बच्चों को वहीँ भेजे ,जहाँ उनका  सर्वांगीण विकास हो | इसके लिए वे कोई भी कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं | अब बच्चा केवल पढ़ाई ही नहीं करता है ,बल्कि जिस बच्चे का जिस चीज में interest होता है ,उसमें आगे भी बढ़ता है | दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि व्यवसायीकरण की होड़ में बच्चे का सर्वांगीण विकास भी होने लगा है | 

                                               तकनीकी शिक्षा इनके लिए एक नए बदलाव की ओर इंगित करती है | आधुनिकता के साथ चलने में ही आज की शिक्षा की जरुरत हो गयी है | globlization के दौर में कोई भी बच्चा पीछे नहीं रहना चाहता है | चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो | माता -पिता भी अपने बच्चों को हमेशा आगे बढ़ते ही देखना चाहते हैं और ये सब चीज़ें आधुनिकीकरण से ही संभव हो पायी है | 
                                              बस ध्यान देने वाली बात यह है कि आधुनिकता का जामा पहनाते -पहनाते स्कूल व्यवसाय में कब तब्दील हो गया ,इसका ध्यान न हमें रहा और न सरकार को | किसी भी चीज के गलत पहलू पे ध्यान तभी जाता है ,जब हम -आप इसके हर पहलू पे सरसरी निगाह डालें | सरकारी अंकुश होना भी बहुत ज़रुरी है |
                          जब देश के हर माता -पिता को लगने लगेगा कि क्या सही है और क्या गलत ,तब तक इन स्कूलों का व्यवसायीकरण नहीं रुक सकता |
                               वैसे मैं इनके आधुनिकीकरण के खिलाफ नहीं हूँ | ये हमारे बच्चों को अच्छा भविष्य देते हैं | हर क्षेत्र में आगे बढ़ाते हैं | बस दुःख तो तब होता है जब पैसे के कारण किसी बच्चे का इन स्कूलों में admission नहीं हो पाता है | वे बस टकटकी लगाए इन स्कूलों के building को देखते रहते हैं | इन बच्चों के माता -पिता इतनी मोटी रकम रकम कहाँ से लाएंगे?  आखिर इनके अंदर भी तो ये उम्मीद रहती ही होगी कि इनका बच्चा भी ऐसे स्कूलों में पढ़ें | साथ -ही साथ जिन बच्चों के माता -पिता इन स्कूलों के interview में पास नहीं हो पाते हैं ,उनका क्या हो ? क्या अनपढ़ माता -पिता के बच्चों को भी इन स्कूलों में पढ़ने का कोई अधिकार नहीं है ? क्या English जानने वाले माता -पिता ही अपने बच्चों का admission यहाँ करा सकते हैं ? बात तो सोचने वाली है | ऐसे कितने सारे प्रश्न हैं ,जो हमें ढूंढने हैं | सरकार को भी इन पर ग़ौर करना ही होगा |
                                                देखते हैं कि बराबरी और बदलाव के दिए की लौ कब और किस तरह प्रकाशमय होती है ,जिसका इंतज़ार शायद देश के हर नागरिक को होगा | 
                                                      

                                         

                                                             
                                                                                     

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