शाम के धुंधलके में कबीर थका -माँदा घर आया | घर आकर देखा तो उसकी दादी अपने कंपकंपाते हाथों से रोटी सेंक रही थी | जैसे ही दादी की नज़र कबीर पर गई ,तुरंत उठकर अपने आँचल से कबीर के माथे पर आए पसीने को पोंछने लगी | […]