महल खड़ा करो या गुमान करो अपनी 100एकड़ जमीन पर पर इस दुनिया से रुखसत होगें बस दो गज जमीन पर सारी चमक – दमक फीकी पड़ जाती है जब कपड़ों के नाम पर बस कफ़न ही रह जाती है ख्वाहिशें इंसान की मिल्कियत होती है झूठ के पुलिंदो पर ही उसकी दुनिया बुनती है जानकर भी वह यथार्थ से […]