मुंह ढकना हमारी नहीं नियति अपनी अस्मत के लिए हमेशा लड़ती जन्म से पहले कोख दगा दे जाता है जन्म के बाद शरीर बुरी नज़रों से बच नहीं पाता है इज्जत तार – तार करने वाले बचकर निकल जाते हैं हम बस सुनी आंखों से इंसाफ की आस में रह जाते हैं जिस्म के साथ – साथ आत्मा भी कराह […]