साइकिल की घंटी बजीआंखें दरवाजे पे लगीखाकी वर्दी में जब दिखा पोस्टमैनअपनों की खबर मिलेगीदिल को मिलेगा चैनडाकिया आया, डाकिया आयाहाथों में पोस्टकार्ड थमायासुख दुख की खबरें होती थींलिखित अक्षरों में जज्बातों की नदियां बहती थींउस पीले- नीले कागज परछोटे – छोटे अक्षरों से कोना – कोना सजता थाफिर भी लिखना अधूरा ही रह जाता थाजाने कहां गए वो दिनजब […]