नदियाँ गहरी, नाव पुरानी,सुनाता हूं तुमको इक बच्चे की कहानी,जब जन्म लिया उसने,नहीं पता था कि कौन है वो,और सभी की तरह,उंगली पकड़ कर चलना सीखा,किसी भी इन्सान में,उसे दुश्मन नहीं दिखा,बचपन में किसी भी मैदान और मकान में खेल लिया करता था,ये घर ऐसा क्यूँ है, वो कस्बा ऐसा क्यूँ है,ये लोग ऐसे क्यूँ हैं, वो लोग ऐसे क्यूँ […]