तीन लोगों ने मिलकर एक छोटे से स्कूल की स्थापना की थी।इन तीनों में से एक थे रवींद्र सर,जो घूम– घूम कर गांव वालों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उनके घर तक चले गए।इस स्कूल का नाम था–सर्वयोदय विद्यालय।अपनी उम्र के 30वें बसंत से ये जिम्मेदारी उठाया। पढ़ाना इनके लिए पूजा से कम नहीं थी।एक स्याह ब्लैकबोर्ड […]