तेरी उंगली पकड़कर  नन्हें पैरों से चलकर  जब दुनिया देखी  पिता की छांव में  अपने को महफूज पाया  खुद की इच्छा को मारकर  खून पसीना बहाकर  पिता ने मंजिल दिखलाया  ऊपर से सख्त पर अंदर से नर्म  पिता शब्द का है असली मर्म  जीवन की हर कठिनाइयों से   लड़ना सिखलाया  मुसीबतों से पहले  पिता का साया पहले पाया  अपने आंसुओं […]