मधुर स्मृतियां धूप– छांव सी पतझड़ में लगती वसंत बहार– सी  सालों से जिन यादों को जीती आई कभी हर्ष तो कभी विषाद की रेखा उभर आई किसी से गिले तो किसी से शिकवे कब किन परिस्थितियों में जिंदगी बन जाती है वनवेयादों की पोटली चितवन से झांकतीपुराने जगह की स्मृति या नए जगह की प्रतीतिअसमंजस में मन की भावनाओं का समुंदरक्या करूं,कैसे करूंशुरुआत चल रही […]