खुद की तलाश

अगर मगर और काश में हूं,मैं खुद अपनी तलाश में हूंदिन के उजालों को सहने की नही है ताकत,इसलिये मैं बुझते हुए दीये की प्रकाश में हूं खेलती है दुखों के साथ,ज़िन्दगी बड़ी शरारती है,सताती है, तड़पाती हैै, गिराती और उठाती है,नासमझ सा हो गया हूं मैं,अब ना किसी की अह्सास में हूं,अगर मगर और काश में ,मैं खुद अपनी […]

आईना और चेहरा

एक रोज सुबह जब मैं उठा,मेरा घमंड जैसे पल भर में टूटा,जब देखा मैने आईना,मेरी नजर फिर आईने की नजर से टकराई ना, कल रात जिस चेहरे को देखा था मैं,जिस चेहरे पर कभी घमंड करता था मैं,वो तो मुझे आईना में दिखा ही नही,बदला सा अन्जाना सा जैसे कभी मेरा था ही नहीं, अजनबी चेहरे को देखकर बिजली सी […]