भाग्य का खेल(Part–2)

गतांक से आगे………. सुषमा की शादी के बाद राजवीर बहुत मायूस रहने लगा था। पर जिंदगी तो यहीं पर खत्म नहीं होती है। अपने आप को व्यस्त रखने के लिए वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। घर के खर्चे चलाने भी जरूरी थे।पिताजी इस दुनिया में नहीं रहे। परिवार में मां और एक छोटी बहन थी।                          मां कहते– […]

भाग्य का खेल(Part–1)

रात के सन्नाटे को चीरते हुए सुषमा के कदम बदहवास से बढ़ते ही जा रहे थे। अभी बस कुछ दिन पहले ही तो उसकी शादी हुई थी और आज मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा पर ससुराल से भागना पड़ गया उसे। बार-बार पीछे मुड़कर देखती, मानो कोई उसका पीछा कर रहा हो। चेहरे पर डर का साया फैला हुआ […]

Lifetime benefites😇😇🤣🤣

 अपने जूनियर चौबे जी बड़े ही खुश लग रहे थे और खुश हो भी क्यों ना🤪 शहर के MLA जो बन गए। अब आप सोच रहे होंगे कि कल तक गली छाप वाले जूनियर चौबे जी आखिर इतनी बड़ी हस्ती कैसे बन गए। किस्सा यह है कि उनके पिता श्री रामलाल चौबे एक सरकारी दफ्तर के वरिष्ठ कर्मचारी थे। पेंशन […]

भंवरी

छोटी– छोटी चार– पांच लड़कियों का हुजूम गांव के इस पुराने बरगद के पेड़ के नीचे खेलने में व्यस्त था। एक– दूसरे को पकड़ने की होड़ लगी हुई थी कि तभी एक तेज आवाज़ ने उनके खेल को भंग कर दिया। भंवरी, अरी ओ! भंवरी कहां मर गई है। जब देखो तब खेल ही सूझता रहता है इसे,कहती हुई एक […]

घिसे चप्पल

बाहर लॉन में रामनारायण ठंडी की मीठी– मीठी धूप का आनंद उठा रहे थे। बड़ा– ही शुष्क मौसम हो चला था। ठंडी बयार जब हड्डियों में लगती तो मानों काट ही डालेगी। यही हवा गर्मियों में कितनी शीतलता प्रदान करती है। सही ही कहा गया है कि परिस्थितियां ही यह तय करती हैं कि इंसान का स्वभाव कैसा होगा?मन ही […]

आरक्षण की गुमशुदगी

पूरे देश में महिला आरक्षण की बात फैली हुई थी। अगर देश को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं की भी सत्ता में भागीदारी आवश्यक है। देश की आधी आबादी यूं अपने अधिकार से वंचित रह जाए, हमें यह स्वीकार नहीं–इसी तरह के नारों से देश गूंज रहा था। राजनीतिक पटल पर ये मुद्दा विपक्षी पार्टी गेंद की तरह उछाल रहे […]

कल्पनातीत(unthinkable life)

           गोमती नदी के मुहाने पे एक नवयुवती विक्षिप्त– सी औंधे मुंह पड़ी हुई थी। जाको राखे साइयां मार सके ना कोई– इस बात को चरितार्थ करती गोमती माई की लहरों ने भंसाली गांव के इस तट पे युवती को लाकर पटक दिया था।                 सुबह का समय था, सूरज की निकलती मुखरित किरणें उसके मलिन होते चेहरे पे पड़ रही थी। पर […]

100 का नोट

 एक चमचमाती हुई कार एक ढाबे के सामने आकर रुकी। शीशा हटा और अंदर से एक रौबदार आवाज ढाबे वाले के कान में पड़ी, अरे! माखनलाल, जरा 1kg बर्फी pack कर देना। ढाबे वाले ने तुरंत अपने नौकर को भेजा मिठाई लेकर। कार के शीशे से छन कर आती सूरज की रोशनी वहीं ढाबे के बाहर बर्तन धो रहे एक […]

Fufaji on🤚🤚

 एक थे हमारे fufaji जिनको संक्षेप में रिटायर्ड जीजाजी की पदवी से उद्घोषित किया जा सकता है। Black &white TV की तरह ही अकड़ भी पाई थी इन्होंने। जैसे टीवी के चैनल को बदलने के लिए इसके स्विच को घूमाना पड़ता है,ठीक वैसे ही इनकी प्रशंसा में पुल बांध दो,तब तो फूफाजी चने की झाड़ पे चढ़ जाते। फिर एकाएक […]

Inside Story(वो फल वाला)

गर्मी  की उमस भरे दिन में बालकनी के मुंडेर पे अपना हाथ रखकर पता नहीं रोजमर्रा की उलझनों में अपने आप को समेटे हुए जाने क्या सोच रही थी| चिल -चिलाती हुई धूप थोड़ी देर में ही आँखों को खटकने लगी | उस पर से लू की गर्म हवा चेहरे को झुलसा रही थी | चारों तरफ नज़र दौड़ाया तो […]