संघर्ष और व्यथा

 हरिया,अरे ओ हरिया! क्या कर रहा है भाई? जैसे ही दीना की आवाज सुनी,हरिया झट से गमछा कंधे पे डाल कर मुंह साफ करते हुए बाहर निकला। उसे पता था कि दीना उसे क्यूं बुला रहा है। असल में रोपनी का समय नजदीक आ रहा था, बीज की व्यवस्था करनी थी, पास में पैसे नहीं थे इसलिए दोनों मिलकर रामधन […]

देश की मिट्टी

 कर्नल समरजीत सिंह बड़े ही देशभक्त और अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। देश की मिट्टी की महक उनके रगों में खून की तरह बहती थी। और हो भी क्यों ना,दादा – परदादाओं के समय से ही फौज में जाने की इच्छा बलवती होती रही थी। उनके दादा जी भारत – पाकिस्तान की लड़ाई में शहीद हो गए थे। पिताजी भी लेफ्टिनेंट रहे। […]

काला टीका🌑🌑

 ऑफिस के लिए जब भी निकलती,मां एक काला टीका हमेशा कान के पीछे लगा दिया करती ।लाख मना करने के बावजूद ये उनका रोज का काम था।कहती कि बुरी बला से तुम्हारी रक्षा हो।उनका प्रेम देखकर मैं भी चुप हो जाया करती थी।बाबूजी पीछे अख़बार पढ़ते हुए मां की बातों पर चुटकी लिया करते। खैर, इसी तरह से हंसते- खेलते […]

नेता जी का आगमन

              एक छोटा सा कस्बा रामपुर, जो आज सफाई की प्रतिमूर्ति बना हुआ था। सुबह से आज हर जगह सफाई कर्मचारी कस्बे को साफ करने में लगे हुए थे।जो जगह कचरे फेंकने का स्थान समझा जाता था ,आज वहां गंदगी का एक तिनका भी नजर नहीं आ रहा था। कहीं-कहीं पे लोगों की कुछ […]