छोटी – सी भूमिका

मेरी जिन्दगी में थोड़ी- सी ही सही,मेरी भी है छोटी-सी भूमिका,फिर ऐसा क्यों लगता है सबको,कि मैं नहीं हूं किसी काम का, मैं सांस भी लेता हूँ और मेरा दिल धड़कता भी है,मैं उदास हो जाता हूं लेकिन मेरा चेहरा हँसता भी है,ये सच है कि आज मैं बेकार हूँ,पर ऐसा नहीं कि मैं लाचार हूँ, एक दिन मैं फिर […]

कलंकिनी

 शहर की बाहरी सीमा से सटा हुआ था वो विधवाश्रम,जहां के नए इंचार्ज बनकर आए थे विनय बाबू।अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण तलाश का ये अंतिम पड़ाव शायद यही हो,यही सोच मन में रखकर शहर के सारे विधवाश्रमो को खंगाल डाला और अपना तबादला करवाते रहे।बड़े – बड़े ओहदों को ठुकराकर विधवा आश्रम की खाक छानने में पता नहीं क्यूं […]

सोच

अपने हालात के बारे में,कुछ सोच रही थी मैं समंदर के किनारे में,एक तेज लहर का झोंका आया,पानी की फुहारों ने भी मेरे गालों को नहीं सहलाया, मेरी उदासी अब मायूसी मे बदलती जा रही थी,मेरी बेबसी भी मेरा मज़ाक उड़ा रही थी,आंखों के आंसू भी फुहारों में छिप गए थे,नजरें भी दूर किसी के इन्तज़ार में खो गए थे, […]

थक गया हूं मैं

थक गया हूं मैं, हाँ! थक गया हूं मैं,केवल एक सुकून की तलाश मेंकहां से चला था और आज कहां हूं मैं,मुझे तो यह भी पता नहीं किजिंदगी मुझे ले जा रही है कहाँ, थक गया हूं मैं, हाँ! थक गया हूं मैं,हर गम समेटे अपने में, सभी की खुशी के लिएजिंदा हूँ मैं केवल अपनों की हंसी के लिए,हर […]

24*7⏳🕛⏳🕛

      सोफे पे बैठी       यूं पैरों को समेटे        जाने क्या सोच रही है    जिंदगी की उलझन को    शायद सुलझाने की कोशिश हो रही है    हां! मैं हूं एक House wife      24*7 चलती है जिसकी life        कामों का सिलसिला रुकता नहीं       सुकुनियत […]

Work from Home🤗🤗🤗🤗

  पूरे देश में कोरोना अपना परचम लहरा रहा था। तत्काल में इसका बस एक ही इलाज था –lockdown। सभी अपने– अपने घरों में कैद हो गए। भई!अपने आप को बचाना है तो social distancing का पालन तो करना ही पड़ेगा। देश के सारे काम ठप्प हो गए। स्कूल – कॉलेज, ऑफिस सब बंद हो गए। ऐसी समस्या हो और […]

मां अगर तू ना होती

Dedicated to All Mothers ……… मां अगर तू ना होती तो दुनिया में मुझे लाता कौन जीवन की पहली पाठशाला तुम,मेरी पहचान बनाता कौन स्पंदन की घड़ियां जो मेरे अंदर चल रही है तुम्हारे रक्त से ही मेरी सांसे बढ़ रही है मेरी ही नींद सोना,मेरी ही नींद जगना मेरी एक आवाज़ से झट से अपनी आंखें खोल देना मुझे […]

चाह

मुंह ढकना हमारी नहीं नियति अपनी अस्मत के लिए हमेशा लड़ती जन्म से पहले कोख दगा दे जाता है जन्म के बाद शरीर बुरी नज़रों से बच नहीं पाता है इज्जत तार – तार करने वाले बचकर निकल जाते हैं हम बस सुनी आंखों से इंसाफ की आस में रह जाते हैं जिस्म के साथ – साथ आत्मा भी कराह […]

बेबसी

  समाज में गुस्सा आज फिर चरम पर है,इस बात की ओर इशारा है कि कानून व्यवस्था से लोग संतुष्ट नहीं हैं।देश में बलात्कार के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।लोगों को अपनी सोच और मानसिकता बदलनी ही होगी।साथ ही प्रशासन को भी चुस्त – दुरुस्त करने की जरूरत है।केंद्र और राज्य सरकारें दोनों मिलकर दोषियों को कड़ी से कड़ी […]

शोर

हर दिन ना जाने कितनी सारी आवाजें हमारे कानों में पड़ती हैं।जो हमारा दिल सुनना चाहता है ,वो कर्णप्रिय होती हैं मगर जो आवाजें हमारी जिंदगी को एक नए मोड़ पे खड़ी कर देती हैं,वो कब शोर में बदल जाती हैं ,पता ही नहीं चलता है।ध्यानचंद के साथ भी तो यही हो रहा है।आवाजों ने शोर का रूप अख्तियार किया […]