जज़्बात

अनकही बातेंमन में है घुमड़तेमेरे जज़्बातकर रहे थे आपस में बातप्लस– माइनस,नफा– नुकसानरहते हैं जिंदगी भर परेशानजो आज हम हैं करतेकल उसी को तो हैं भरतेआते– जाते कहीं पे अटकीतभी एक बूढ़ी औरत को देख ठिठकीठक– ठक करती लाठी उनकीकमर भी थोड़ी झुकी– झुकीएक कदम चलती, दूसरे कदम बैठतीउम्र की ढलान ऐसी ही है होतीपड़ोस के मकान में थी रहतींआते– […]

Lifetime benefites😇😇🤣🤣

 अपने जूनियर चौबे जी बड़े ही खुश लग रहे थे और खुश हो भी क्यों ना🤪 शहर के MLA जो बन गए। अब आप सोच रहे होंगे कि कल तक गली छाप वाले जूनियर चौबे जी आखिर इतनी बड़ी हस्ती कैसे बन गए। किस्सा यह है कि उनके पिता श्री रामलाल चौबे एक सरकारी दफ्तर के वरिष्ठ कर्मचारी थे। पेंशन […]

डरावने सपने(Nightmare)😱😱

हर रात की तरह आज रात भी मानवी नींद में बड़बड़ाती जा रही थी, चले जाओ यहां से, मेरे पास मत आओ,कहतेे– कहते अचानक से उठ बैठी। लंबी– लंबी सांस लेते हुए इधर– उधर देखने लगी। उसके चिल्लाने की आवाज़ सुनकर बगल वाले कमरे से उसकी मां दौड़ते हुए आई तो देखा कि मानवी ठंड के मौसम में भी पसीने […]

सीधा –साधा दिल

सीधा– साधा दिलहो गई है मुश्किलथी जिंदगी उसकी बेपरवाहहर फिक्र को उड़ा रहा था वहपर अचानक क्या हुआएक एहसास दिल के अंदर आयाआते– जाते डगर पेनज़रें पड़ी किसी पेआंखों से आंखें टकराईंदिल की घंटी घनघनाईहर दिन करता था उसका इंतजारदिल ढूंढता था बार– बारना अक्श देखा,ना नाम पूछाबस उसका मुस्कराना लगा अच्छाक्या था,क्या बन गयाख्वाब देखना ही दस्तूर हो गयाउसे […]

भंवरी

छोटी– छोटी चार– पांच लड़कियों का हुजूम गांव के इस पुराने बरगद के पेड़ के नीचे खेलने में व्यस्त था। एक– दूसरे को पकड़ने की होड़ लगी हुई थी कि तभी एक तेज आवाज़ ने उनके खेल को भंग कर दिया। भंवरी, अरी ओ! भंवरी कहां मर गई है। जब देखो तब खेल ही सूझता रहता है इसे,कहती हुई एक […]

Happy New Year

नूतन वर्षसमय का उत्कर्षनई उमंगनई तरंगबढ़ रही है ज़दगी नई तारीख़ के संगनूतन वर्ष अभिनंदनकरते हैं तुहारा नमनआरंभ का अंतया अंत का आरंभनए विचारों का हो रहा है शुभारंभगुजरे साल की यादें मन में समेटेआने वाले साल को चलो खुशियों में लपेटेनूतन वर्ष अभिनंदनकरते हैं तुहारा नमनआने वाला साल गुजरता हैफिर गुजरे साल की शुभ संध्या पे आने वाले साल […]

घूंघट में छिपी मुस्कान

घूंघट में छिपी मुस्कानअधरों में फंसी है सबकी जानवो चंचल चितवनजैसे हिरनी स्वछंद विचरती वन वननैनों की तीक्ष्ण कतारहृदय को भेदे आर पारचरित्र पे ना कोई दागपर उसके दिल में लगी थी आगआखिर कोमलता और भीष्णता का क्या था रहस्य सौम्यता और रुद्रता का मेल था अवश्यसालों पहले की है बातविस्मरण होती नहीं हकीकतगांव की स्वच्छंदता में जी रही थी […]

घिसे चप्पल

बाहर लॉन में रामनारायण ठंडी की मीठी– मीठी धूप का आनंद उठा रहे थे। बड़ा– ही शुष्क मौसम हो चला था। ठंडी बयार जब हड्डियों में लगती तो मानों काट ही डालेगी। यही हवा गर्मियों में कितनी शीतलता प्रदान करती है। सही ही कहा गया है कि परिस्थितियां ही यह तय करती हैं कि इंसान का स्वभाव कैसा होगा?मन ही […]

आरक्षण की गुमशुदगी

पूरे देश में महिला आरक्षण की बात फैली हुई थी। अगर देश को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं की भी सत्ता में भागीदारी आवश्यक है। देश की आधी आबादी यूं अपने अधिकार से वंचित रह जाए, हमें यह स्वीकार नहीं–इसी तरह के नारों से देश गूंज रहा था। राजनीतिक पटल पर ये मुद्दा विपक्षी पार्टी गेंद की तरह उछाल रहे […]

फटे कपड़े:बदहाली या आधुनिकता

कहीं फैशनपरस्त जिंदगीतो कहीं जिंदगी में बेचारगी की मौजूदगीफटे वस्त्रों में तन दिखता हैतो कहीं तन दिखने के लिए वस्त्र फटता हैआधुनिकता की होड़ तो देखोफटी जींस ऊंचे दामों पे बिकती हैऔर उस गरीब की फटी धोती किसी को नजर नहीं आती हैफटी जींस आधुनिकता की पहचान हैतो इन चिथड़ों से झांकती जिंदगी की भी दास्तां हैकिसी धागे से दूरी […]